Sunday, December 17, 2017
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लोक सभा के ‘रण’ में ‘आप’ के रणबांकुरे…

August 31, 2014 02:35 AM

लांग होने के बावजूद इनकी भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी है। मुकुल कई राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में बतौर पत्रकार भ्रष्टाचार से लड़ाई लड़ते रहे हैं। खद्य एवं रसद विभाग, शिक्षा विभाग तथा मिलावट खोरों के द्वारा किए जाने वाले अनेकों भ्रष्टाचारों को इन्होंने उज़ागर किया। वर्ष 2009 में मुकुल त्रिपाठी को श्रेष्ठ विकलांग कर्मी चुना गया। भ्रष्ट तंत्र को बदलने की तीव्र उत्कंठा मुकुल को विकलांगता के बावजूद विलक्षण बनाती है। वे अदम्य साहस एवं दृढ़ विश्वासी हैं। विकलांगों के कल्याण के लिए मुकुल ऐसी योजना चाहते हैं जिससे शारीरिक रूप से अक्षम लोग भी देश की मुख्य धारा से जुड़ कर राष्ट्र निर्माण में भूमिका अदा कर सकें।
7. राज्य-उत्तर प्रदेश, लोकसभा क्षेत्र – सहारनपुर, उम्मीदवरा – योगेश दहिया
योगेश 1996 से समाज सेवा के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। इन्होंने भूमि अधिग्रहण, अधिकारों के प्रति जागरूकता व फसलों के न्यूनतम मूल्य व समर्थन मूल्य जैसे मुद्दों पर विस्तार से कार्य किया है। योगेश दहिया एक आरटीआई कार्यकर्ता हैं। जिन्होंने अपने क्षेत्र की तमाम समस्याओं के निदान का प्रयास अपने सूचना के अधिकार का प्रयोग करते हुए किया है। योगेश जनलोकपाल की लड़ाई में पूरी तरह सक्रीय रहे हैं। इन्होंने निर्भया आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया तथा आम आदमी पार्टी की तमाम गतिविधियों में भी सक्रीय भूमिका निभाई।
8. राज्य – महाराष्ट्र – लोकसभा क्षेत्र – मुंबई दक्षिण, उम्मीदवार – मीरा सान्याल
मीरा भारतीय इन्वेस्टमेंट बैंकर और राजनीतिज्ञ हैं। मीरा जनलोकपाल आन्दोलन के दौर से ही आन्दोलन से जुड़ी हैं। कुछ समय पूर्व ही मीरा आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर सक्रीय रूप से पार्टी में शामिल हुई हैं। मीरा जनलोकपाल आन्दोल के दौरान भी आन्दोलन में सक्रीय रही। वे राॅयल बैंक आॅफ स्काॅट लैण्ड की 21 वर्षों तक भारत में सीईओ व चेयर पर्सन रही हैं। अपने 30 वर्षों के बैंकिंग करियर में मीरा सान्याल ने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए महिलाओं के लिए अभूतपूर्व एवं उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वे लम्बे समय से सामुदायिक विकास कार्यक्रमों और नीतिगत सुधारों से जुड़ी रही हैं। मीरा को फिलन्थ्रोपिस्ट आॅफ द ईयर-2011 से गैर सरकारी संगठनों के फिक्की परिसंघ द्वारा पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा वे वुमेन आॅफ सब्स्टांस अवार्ड-2010, रोटरी क्लब आॅफ इण्डिया। कर्मवीर पुरस्कार-2008, वुमेन बैंकर आॅफ द ईयर-2006, भारतीय विजनेस चैम्बर द्वारा तथा एआईईएसईसी हाॅल आॅफ फेम पुरस्कार एआईईएसईसी अन्तर्राष्ट्रीय कांग्रेस पोलैण्ड द्वारा सम्मानित किया गया।

9. राज्य – उत्तर प्रदेश- लोकसभा क्षेत्र – बगपथ – उम्मीदवार – सोमेंद्र ढाका
छात्र जीवन से ही सोमेंद्र ढाका, सामाजिक गतिविधियों में सक्रीय रहे हैं। जनलोकपाल के लिए रामलीला मैदान व जन्तर-मन्तर पर हुए आन्दोलन में भी उन्होंने बढ़-चढ़ कर भूमिका निभाई। इन्होंने निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर के माध्यम से सैकड़ों लोगों की आंखों के आपरेशन करवा कर उनके जीवन में नई रोशनी भर दी। सोमेंद्र ढाका, ढिकोली इण्टर कालेज़ प्रबंध समीति के अध्यक्ष हैं। भ्रष्टाचार के विरूद्ध हर अभियान में बढ़-चढ़ कर भूमिका निभाते हुए सोमेंद्र ढाका देश का गौरव एक ईमानदार राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठापित करने में अपना योगदान देना चाहते हैं।
10. राज्य- मध्यप्रदेश, लोकसभा क्षेत्र – खंडवा – उम्मीदवार – आलोक अग्रवाल
आलोक अग्रवाल ने आईआईटी कानपुर से बी.टेक की पढ़ाई के दौरान ही पास की हरिजन बस्ती में स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी समस्याओं के निदान के लिए समय देना आरंभ कर दिया था। 1989 में पढ़ाई पूरी करने के उपरांत उन्होंने देश भर के कई संगठनों व संस्थाओं से जुड़ कर देश की समस्याओं को समझने के उपरांत नर्मदा बचाओ आन्दोलन से पूर्णकालिक रूप से जुड़ने का निर्णय लिया। पिछले 24 वर्षों से नर्मदा घाटी में लाखों विस्थापितों के अधिकारों के संघर्ष के नेतृत्व की कमान समय-समय पर आलोक संभालते रहे हैं।

11. राज्य – उत्तर प्रदेश- लोकसभा क्षेत्र- अमेठी – उम्मीदवार – कुमार विश्वास
कुमार विश्वास अगस्त 2011 के दौरान जनलोकपाल आंदोलन के लिए गठित टीम अन्ना के एक सक्रिय सदस्य रहे हैं। वे 26 नवंबर 2012 को गठित आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। डाॅ. कुमार विश्वास, जनलोकपाल आंदोलन के दौरान मंच संचालक रहे। इन्होंने आम आदमी पार्टी में युवा जागृति के लिए सराहनीय योगदान दिया है। संघर्ष के दौरान कई बार गिरफ्तार भी हुए। डॉ॰ कुमार विश्वास ने अपना कैरियर राजस्थान में प्रवक्ता के रूप में 1994 मे शुरू किया। तत्पश्चात वे कई महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य कर चुके हैं। इसके साथ ही डॉ॰ विश्वास हिन्दी कविता मंच के सबसे व्यस्ततम कवियों में से एक हैं। उन्होंने अब तक हजारों कवि-सम्मेलनों में कविता पाठ किया है। साथ ही वह कई पत्रिकाओं में नियमित रूप से लिखते हैं। डॉ॰ विश्वास मंच के कवि होने के साथ साथ हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री के गीतकार भी हैं। उनके द्वार लिखे गीत अगले कुछ दिनों में फिल्मों में दिखाई पडं़ेगे। उन्होंने आदित्य दत्त की फिल्म चाय-गरम में अभिनय भी किया है.
12. राज्य – महाराष्ट्र – लोक सभा क्षेत्र – पूणे – उम्मीदवार – वरे सुभाष शंकर राव
शंकर राव आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। उनके संघर्ष की वास्तविक गाथा शुरू होती है आदिवासी आंदोलन से। इन आंदोलनों के जरिए अदिवासियों को उनके अधिकारी दिलवाने के लिए सुभाष ने कई आंदोलन किए। किसानों के लिए सुभाष शंकर राव ने लम्बी लड़ाई लड़ते हुए जहां उनके अधिकारों की पैरवी की वहीं असंगठित कामगारों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर उन्हें अधिकार दिलवाने तक की जंग भी इनके खाते में है। सुभाष शंकर राव पिछले 25 वर्षों से कई दर्जन आंदोलनों के न सिर्फ जनक रहे हैं बल्कि लाखों दबे कुचले लोग उनके संघर्ष के कारण आज अपने अधिकार पा सकें हैं। इन्होंने दिल्ली में जनलोकपाल आंदोलन के दौरान जहां एक ओर बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया वहीं अपने क्षेत्र में भी इस आंदोलन को घर-घर पहुंचाया।

13. राज्य – पंजाब – लोक सभा क्षेत्र – लुधियाना – हरविंदर सिंह फुलका
हरविंदर सिंह फुलका जाने माने समाजसेवी हैं। 1984 के दंगों में कत्ल किए गए सिखों के लिए इंसाफ की लड़ाई फुलका पिछले 30 वर्षों से लड़ रहे हैं। वर्ष 2012 में पंजाब में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान किसी भी प्रकार के नशे व शराब के चलन के विरोध में इन्होंने जुलूस निकाला। चुनाव आयोग भारत सरकार के सहयोग से निकाले गए इस जुलूस के माध्यम से पंजाब के 15 जिले कवर करते हुए 800 कि.मी का सफर तय किया गया। वे ज्ञान सेवा ट्रस्ट के माध्यम से सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों के एआईईईई तथा आईआईटी तथा पीएमटी में जाने के इच्छुक बच्चों को निःशुल्क कोचिंग अभियान से जुड़े हैं। हरविंदर फुलका जहां एक ओर समाज सेवा के प्रति समर्पित एक जानी-मानी हस्ती हैं वहीं संघर्ष के मोर्चे पर भी वे प्रथम पंक्ति में खड़े नज़र आते हैं। फुलका अन्ना आंदोलन के दौर से ही अभियान से जुड़े हैं।

14. राज्य – उत्तर प्रदेश – लोक सभा क्षेत्र – मुरादाबाद – उम्मीदवार – ख़ालिद परवेज़
ख़लिद एक व्यवसायी एवं सामाज सेवक हैं। पिछले 22 वर्षों से वे समाज सेवा से जुड़े हैं। गरीबों , समाज के दबे कुचले लोगों व उनके परिवार के सदस्यों को व्यवसायिक शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाने के अपने अभियान में खालिद पिछले दो दशकों से कार्यरत हैं। आम आदमी पार्टी से जुड़ कर समाज सेवा के कार्य को गति देने की तमन्ना है।
15. राज्य – हरियाणा – लोकसभा क्षेत्र – गुड़गांव – उम्मीदवार – योगेंद्र यादव
योगेंद्र यादव जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता एवं देश के प्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक हैं. वे विकासशील समाज के अध्ययन के लिए केंद्र के वरिष्ठ अध्येता हंै. योगेन्द्र यादव भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ जुड़े हंै. शिक्षा के अधिकार कानून मेें योगेंद्र यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वे वर्ष 2010 में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य बने। योगेंद्र वर्तमान में आम आदमी पार्टी राजनैतिक सलाहकार समिति के सदस्य हैं। आम आदमी पार्टी ने उन्हें हरियाणा में आयोजित होने वाले चुनावों का प्रभारी नियुक्त किया है। योगेंद्र यादव आम आदमी पार्टी के महत्वपूर्ण सदस्य होने के साथ-साथ पार्टी के नीति निर्धारकों में भी शामिल हैं।

16. राज्य – उत्तर प्रदेश – लोकसभा क्षेत्र- मैनपुरी – उम्मीदवार – बाबा हरदेव सिंह
बाबा हरदेव सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा आईएएस से सेवानिवृत्त हुए हैं. वे उत्तर प्रदेश के सबसे लोकप्रिय और ईमानदार लोक सेवकों में शामिल थे। वे उत्तर प्रदेश के पीसीएस अधिकारी संघ के अध्यक्ष रहे. बाबा हरदेव सिंह के प्रमुख संभावित प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव होंगे।
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17. राज्य – दिल्ली – लोकसभा क्षेत्र- पश्चिमी दिल्ली, उम्मीदवार – जरनैल सिंह,
जरनैल सिंह 1984 के सिख विरोधी दंगा पीडि़तों के अधिकारों के लिए एक अथक योद्धा हंै. वे दंगा पीडि़तों को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन में शामिल होने से पहले एक पत्रकार थे. जरनैल का मुकाबला कांग्रेस सांसद व संभावित प्रत्याशी महाबल मिश्रा से माना जा रहा है .
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18. राज्य – उत्तर प्रदेश- लोकसभा क्षेत्र- लालगंज- उम्मीदवार- डॉ. जिया लाल राम
मुख्य प्रधान वैज्ञानिक रहे हैं। 1984 के भोपाल गैस कांड नियंत्रण में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन्हें महाराष्ट्र सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया.
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19. राज्य- महाराष्ट्र – लोकसभा क्षेत्र- मुंबई उत्तर पूर्व – मेधा पाटकर

मेधा पाटकर परिचय की मोहताज नहीं हैं, वे गुजरात में नर्मदा नदी पर विवादास्पद सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए संघर्ष करती रही हंै, वे अन्तर्राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता हंै। वे नर्मदा बचाओ आंदोलन समेत अनेकों जन आंदोलनों से जुड़ी रही हैं। राष्ट्रीय गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार, एमनेस्टी इंटरनेशनल के मानव अधिकार रक्षक पुरस्कार विजेता हैं। मेधा पाटकर एनसीपी के संभवित उम्मीदवार संजय दीना पाटिल के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।
20. राज्य – महाराष्ट्र – लोक सभा क्षेत्र- नागपुर- उम्मीदवार – अंजलि दामनिया
आप महाराष्ट्र की संयोजक अंजलि दामनिया एक जुझारू एवं सशक्त नेत्री हैं। उन्होंने राकांपा सरकार के सिंचाई मंत्रालय में 70000 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश किया। अंजली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मज़बूत स्तंभ व भाजपा के तत्कानीन अध्यक्ष के घोटाले भी देश के सामने ला चुकी हैं। उन्होंने महाराष्ट्र भर में पार्टी की विचारधारा को घर-घर पहुंचाने में महत्वपूर्ण किरदार अदा किया। अंजली नागपुर से भाजपा के संभावित उम्मीदवार नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव मैदान में होंगी।

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21.राजमोहन गांधी, उम्मीदवार, पूर्वी दिल्ली, दिल्ली
महात्मा गांधी जी के पौत्र राजमोहन गांधी जी एक विद्धान, और पत्रकार है। श्री गांधी जी एक जीवनी लेखक होने के साथ-साथ दक्षिण एशिया व मध्य पूर्व केन्द्र, इलिनोइस यूनिवर्सिटी, अमेरिका, में वे शोधकर्ता प्रोफेसर भी हंै. वे गांधीनगर भारतीय इस्टीट्यूट आफ तकनीक के भी विद्धान रहे है। वह संसद की अनुसूचित जाति एवं जनजाति पर आयोजित समिति के संयोजक रहे हंै.

22. शेखढ़ा अतुलभाई गोविंद भाई…आप उम्मीदवार जूनागढ़, गुजरात.
पढ़े लिखे अतुलभाई, पेशे से इंजीनियर हैं. वह जनलोकपाल आंदोलन के दौरान सक्रिय रहे हैं और जूनागढ़ मंे किसानांे के भूमि अधिग्रहण आन्दोलन मंे नेता रहे हंै वे एक अच्छी सरकार के मजबूत पक्षधर हैं.

23. नवीन जयहिन्द, उम्मीदवार, रोहतक, हरियाणा.
नवीन हरियाणा राज्य मंे सूचना अधिकार और स्वराज के लिये, एक सच्चे समाज सेवक की भांति नेतृत्व कर रहे हंै नवीन जयहिन्द। वे समय-समय पर रक्त दान और अंगदान कैंप लगाते रहे हैं। जयहिन्द नाम से उन्होनें 15 अगस्त 2006 को विद्धार्थियों का संगठन बनाया। नवीन, आरंभ से ही जनलोकपाल आंदोलन से जुडे़ रहे हंै।

24..बलविंदर कौर, उम्मीदवार, कुरूश्रेत्र, हरियाणा
श्रीमती बलविंदर कौर, भारतीय किसान संघ की सदस्य हंै. उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान आठ दिन जेल में रह कर किसानों के हक की लड़ाई लड़ी। वह फारुनि जट्टां महिला मंडल की अध्यक्ष भी हंै। एक जुझारू नेता के रूप में कुरुक्षेत्र के किसानो में इनकी पहचान है।

25. पूनम चंद राठी, उम्मीदवार सिरसा, हरियाणा.
श्रीमती राठी 2013 में अग्निशमन सेवा विभाग से सेवा निवृत हुई हैं. वह एक जानी, मानी समाज सेविका हंै. सफाई कर्मचारियों ओर पेंशनधारियों के लिये वह दिन रात काम कर रही हैं।

26.युद्धवीर सिंह ख्यालिया, उम्मीदवार , हिसार, हरियाणा
श्री ख्यालिया एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं जिन्हांेने अपनी पी.एच.डी ‘सुरक्षापूर्ण रक्त दान प्रबंधन’ में की है. ‘रक्त दान जागरण मेला’ के लिये इन्हें 1998 में लिम्का बुक आफ रिकार्ड में स्थान मिला. इन्हें मदर टेरेसा स्मृति अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है. साक्षरता अभियान और सफाई अभियान में भी सिंह सक्रिय रहे हंै।

27. जयसिंह ठेकेदार, उम्मीदवार, सोनीपत हरियाणा.
पेशे से वकील और पिछले दो सालों से बार संघ के अध्यक्ष हंै. पिछले आठ सालों से सक्रिय समाज सेवक के रूप में कार्यत हंै आर्य प्रतिनिधि सभा के सचिव रहे हंै. वे कसंदा गांव के सरपंच रहे हंै और गोशाला के अधयक्ष भी रहे हंै। भूमि अधिग्रहण आन्दोलन के विरुद्ध भी वे सक्रिय रहे हंै।

28. डॉक्टर राजन सुंशान्त. उम्मीदवार कांगडा, हिमाचलप्रदेश
वे कांगडा लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे हंै. उन्हांेने जेपी बांध पुनर्वास के लिए काम किया है, इनकी भूमिा किसान और मजदूर आंदोलन में सराहनीय रही है। अपने आंदोलन के दौरान सुशांत कई बार जेल भी गए। 1982 में वे संसद में सबसे युवा विधायक मनोनीत हुए। हिमाचल प्रदेश से चार बार चुनाव जीत कर वे सांसद रहे हैं.

29. भावना भावेश वासनिक
अमरावती से भावना वासनिक, अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हैं. भावना गृहणी हैं. शिव सेना के धुरंधरो के खिलाफ आम आदमी पार्टी की तरफ से खड़े होकर, उन्हें धूल चटा कर, वे बहुत जल्द ही देश में महिलाआंे के लिये प्रेरणा स्त्रोत बनेंगी। इन्हांेने देश भर में एड्स के उन्मूलन हेतु जागरूकता अभियान चलाया है. बच्चों के लिये इन्होंने कई बालहित कार्यक्रम आयोजित किये हंै. समाज द्वारा प्रताडि़त परधि आदिवासियों के लिये, भावना ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने में जुटी रहती हंै, जिनसे उन्हें जीवन यापन में सहायता मिल सके, रोज़गार मिल सके, और सामाजिक कुरीतियों को यह आदिवासी पीछे छोड़ सकंे.

30 समीना अब्दुल मजीद खान.
समीना को, जन प्रतिनिधियों द्वारा खराब प्रदर्शन के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिये जाना जाता है. यूपी मिराज मेें जन्मी समीना पेशे से वकील हैं. इन्होेंने अपने पेशे के दौरान कई लेबर यूनियन के मामलों को, सच के सामने लाकर खड़ा किया हैं. देश की एकता और अंखडता में पूर्ण विश्वास करने वाली समीना यह मानती हंै कि देश के युवाओं को प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी उठा कर पुराने नेताओं को उखाड़ फेकना चाहिए.

31. मारूति बापकर
मारूति बापकर ने झोपड़ पट्टी में रहने वालों को पक्के मकान दिलवाने के लिये सरकार से लड़ाई लड़ी. मारूति बापकर को भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन के लिये महाराष्ट्र में जाना जाता है. बह नगर निगम में पार्षद रह चुके हैं. वे एक आर.टी.आई एक्टिविस्ट हंै. उन्होंने रत्नागिरी और मावाल के एसईजी पर प्रश्न उठाए और लवासा प्रोजेक्ट द्वारा बेघर हुये लोगों के आन्दोलन का नेतृत्व किया. मारूति बापकर वह आवाज़ है जिसकी देश को जरूरत है.

32. वामन राव
वामन राव ने कहा की इस देश में सब सामान है पर कुछ लोग ज्यादा सामान है. वामन भारत में असमानता पर बहुत समय से आन्दोलन कर रहे हैं. विशिष्ट लोगांे को मिलने वाली विशिष्ट सुविधाएं, आम लोगों को क्यों नहीं मिलती ?
इस पर वामन आवाज उठाते रहते हैं. वे महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व सदस्य रहे हंै.

33 ललित बब्बर.
कृषि घराने में पैदा होने वाले ललित बब्बर, राजनीति विज्ञान में डिगी और पत्रकारिता में डिपलोमा ले चुके हंै. ललित के जीवन पर जे.पी. आन्दोलन का गहरा प्रभावपड़ा. उन्होंने महाराष्ट्र के सूखा पीडि़त इलाकांे के लिये जी जान से काम किया. इन्होंने लोगों को समानता, सामाजिक न्याय और अधिकारांे के बारे में जागरूक कर विकास पर जोर दिया। यह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में काम कर चुके हैं. ब्राजील में आयोजित सामाजिक गोष्ठी में ललित समाज कल्याण पर अपनी योज़ना प्रस्तुत कर चुके हैं. यह दलित संस्था के संस्थापक सदस्य हैं. इस संस्था की शाखाएं सात राज्यों में हंै. इन्होंने इस संस्था द्वारा समाज से वंचित लोगांे को रोज़गार दिलाने के लिये काम किया है. यह विकास द्वारा लोगांे को जागरूक कर समाज में सामाजिक न्याय और स्वतंत्र मूल्यों को अहम् बनाना चाहते हंै.

34. सुभाष लोम्टे
भारत में असंगठित क्षेत्र के किसी भी सामाजिक सुरक्षा या लाभ से रहित मुददों पर पुनर्विचार और इस क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए आंदोलन की अगुवाई सुभाष लोमटे कर रहे हैं। औरंगाबाद के सुभाष कृषि श्रमिकों, कुलियों के लिए काम करने वाले संगठनों तथा सामाजिक और आर्थिक शोषण के खिलाफ निर्माण श्रमिकों और घरेलू श्रमिकों का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने आजीविका, शिक्षा और स्वास्थ्य की प्राथमिक जरूरतों के लिए लोगों को सरकार से काफी मदद दिलवायी है और भविष्य की पीढि़यों के लिए एक बेहतर माहौल सुनिश्चित करना चाहते हैं। सुभाष मराठवाड़ा विकास आंदोलन, भूमि के लिये टिलर आंदोलन का अंग रहे हंै. इन्हांेने जीव रसायन में स्नातकोत्तर डिग्री ली है।
35. संजीव साने
संजीव साने ने सामाजिक कार्यकर्ता भाई वैद्य के साथ और समाज वादी जन परिषद में लम्बे समय तक काम किया है. यह महाराष्ट्र के एक लोकप्रिय और सम्मानित जन नेता हंै। पिछले कुछ वर्षों से यह कई ऐसे सामाजिक आंदोलनों का हिस्सा रहे हैं. व्यवस्थागत खामियां और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ इन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया है. वे जन लोकपाल आंदोलन के एक सक्रिय सहयोगी थे और उन चंद लोगों में थे जिनका मानना था कि भारतीय राज्य व्यवस्था को बदलने के लिए यह आंदोलन जरूरी है।
36. नंदू माधव
एक फिल्म अभिनेता और थिएटर अभिनेता सरकार और राजनीति पर आपनी बेबाक राय के लिये जाने जाते हैं।इन्होंने अभी हरिशचन्द्र आचार्य फैक्टरी में अभिनय किया है जिसे 2010 में भारत की तरफ से आॅस्कर के लिये भेजा गया था. दो दशकों में इन्होंने महाराष्ट्र में थिएटर के लिये काम करते हुये, प्रदेश का भ्रमण किया और पाया की लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. इन्हें इनके लोकप्रिय नाटक “शिवाजी भूमि के नीचे भीम नगर मोहल्ले में“ के लिये जाना जाता है, जिसे कई पुरुस्कार मिले. इस नाटक के द्वारा इन्होंने शिवाजी को न केवल हिन्दूआंे, बल्कि मुस्लिम और दलितों के नेता के रूप में प्रदर्शित किया.

37. दिलीप म्हास्के
दिलीप मुंबई में कंदवाली के रहने वाले हैं. बहुत साल पहले, सरकार ने जब बुलडोजर से झोपड़ पट्टीयों को हटाया तो दिलीप ने अपना घर खो दिया. उस हादसे के बाद, दिलीप ने जी तोड़ मेहनत करके पढ़ाई की, और लॉ में डिग्री हासिल की. डॉक्टरेट लेने के लिये अमेरिका गए. जलना के किसान परिवार में जन्मे दिलीप ने अपनी म्हणत से समाज में आदरणीय स्थान पाया. दिलीप ने सिविल सोसाइटी में काम करते हुये गरीबांे की शिक्षा और स्वास्थ के लिये योजनाएं बनाई और वंचित समाज को लाभ पहुंचाया. इसके लिये इन्हें मान अवार्ड के लिये चयनित किया गया. दिलीप ने मुंबई की पांच झोपड़ पट्टी में बस रहे गरीबांे की जिंदगी में अभूतपूर्व बदलाव लाया. उन्हें शिक्षा और अच्छा स्वास्थ दिलवाया. इन्हांेने स्वाभिमान योजना के अंतर्गत 18 लाख किसानांे को जमीन दिलवाई.
38. प्रशांत मिश्रा.
महाराष्ट्र के गोंदिया से आम आदमी पार्टी के लोक सभा उम्मीदवार श्री प्रशांत मिश्रा काफी लम्बे समय से राज्य की समस्याओं को सुलझाने हेतु प्रयासरत रहे हैं. उन्होंने अपने जीवन की मूल शुरुआत सॉफ्टवेर सेवा और प्रबंधन के क्षेत्र से की जिस के बाद अब वह अपनी योग्यताओं का प्रयोग जनहित में करना चाहते हैं. प्रशांत शर्मा का बचपन विदर्भ में बीता है. उनकी स्कूली शिक्षा एक स्थानीय सरकारी स्कूल में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने भारत में ही इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और अमरीका से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है. उनकी पत्नी तथा वह स्वयं अपना सॉफ्टवेर काव्यापार सँभालते हैं, जिनके कार्यालय नागपुर तथा अमरीका में स्थित हैं. प्रशांत कई सारे प्रयत्नशील सामाजिक विकास कार्यों में शामिल रहे हंै तथा अन्ना आन्दोलन में भी भागीदारी निभा चुके हैं।

39. अनीता हिन्दोलिया
अनीता मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक बहुत ही गतिशील महिला हैं. वह एक बहुत ही समर्थ परिवार से हैं. वह खुद का एक पेट्रोल पंप भी चलाती हैं वह काफी समय से औरतों और बच्चों के हक के लिए लड़ती आ रही हैं.

40. कैलाश अवस्या
कैलाश अवस्या एक ऐसा नाम है जो नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़ा हुआ है. यह एक शिक्षित आदिवासी नेता भी है. इन्होंने स्नातक की उपाधि ली है. और सरकारी स्कूल में अध्यापन का कार्य भी किया है। नर्मदा बचाओ आंदोलन में जुड़ने के बाद कुछ ही सालों में नौकरी छोड़ दी. आदिवासियों में यह एक सम्मानित हस्ती माने जाते हैं। किसी पिछड़े वर्ग से शिक्षित नेता का मिलना मुश्किल होता है. इस लिहाज़ से कैलाश अवस्या काफी मूल्यवान हंै.
41. कैप्टन अब्दुल नासिर हनफी
ये एक सेना से सेवा निवृत्त वीर चक्र प्राप्त विंग कमांडर हैं. ये इंदौर के रहने वाले हंै. इनमंे अच्छी नेतृत्व क्षमता है.
42. पारस सेकलेच्छा
पारस जी पूर्व विधायक (निर्दलीय) रह चुके हंै. इन्हांेने मध्य प्रदेश में विधान सभा में बहुत से सवाल उठाए हंै इन्हांेने कुपोषण को लेकर सभा में चर्चा करवाई और कई परीक्षाओं को लेकर सवाल खड़े किये. ये एक साफ सुथरी छवि वाले व्यक्ति हैं.
43. खुमन सिंह आरमो
ये एक सेवानिवृत डी.एस.पी और मंडला, मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं. खुद कि ही इच्छा से ये किसान का काम करते हैं. किसानों कि दुर्दशा, और आदिवासी बच्चों पर बहुत सहानुभूति रखते हंै. इन्हांेने मंडला में शिक्षा व्यवस्था पर बहुत काम किया है.
44. भगवत सिंह राजपूत
बी एस राजपुत शुरू ही से पार्टी के साथ जुड़े हुए हंै इनके बहुत से मध्य प्रदेश के नेताआंे से अच्छे सम्बन्ध हैं। काफी समय से विदिशा विधान सभा श्रेत्र से जुडे़ हैं.
45. डा. धर्मवीर गांधी.
पंजाब मंे एक प्रसिद्ध कार्डियोलोजिस्ट हैं. विद्यार्थी जीवन से ही आंदोलन कारी रहे हंै और आपातकाल के समय जेल भी गये।
सरकारी सेवा के तहत इन्होंने ग्रामीण विकास के लिए माॅडल विकसति किया था।
46. मेजर सुरिंन्दर कुमार पुनिया
राष्ट्रपति पुरस्कार पाने वाले सबसे युवा. 2013 के विशिष्ट सेवा मैडल से सम्मानित पुनिया जी एक डाक्टर हंै ये जनलोकपाल आंदोलन से प्रभावित हुए और आर्मी से रिटायर होकर अपने आपको देश सेवा में समर्पित कर दिया.
47. अशोक कुमार जैन
अशोक कुमार जैन राजस्थान में आप पार्टी को स्थापित करने वाले सदस्यों में शामिल हंै ये पहले व्यक्ति हंै जिन्हांेने राजस्थान नगर निगम में राइट टू रिकाल को लागू किया।
48. राज कादयान
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल इंण्डियन आर्मी, सेवानिवृत लोगांे के लिये काम कर रहे हैं इन्हांेने सेवा निवृत लोगों के लिये एक संगठन भी बनाया है। इन्हांेने एक रंक एक पेंशन के खिलाफ लड़ाई लड़ी अब गुड़गांव मंे रह रहे हंै.
49. डा मुजफ्फर भट्ट
डॉक्टर मुज़फ्फर भट्ट ने सूचना के अधिकार को जम्मू और कश्मीर के लोगांे के हितों के लिये आंदोलन के रूप में इस्तेमाल किया.
50. डा. प्रभात रंजन दास, बिहार दरभंगा
पेशे से मेडिकल डॉक्टर हंै. इन्होंने एमबीबीएस, एमडी तथा पीएचडी की है. इन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के शहर न्यू जर्सी में लम्बे समय काम किया व समय समय पर दरभंगा आकर सामाजिक कामों में पैसा लगाते रहे हैं. प्रभात जी ने गाँव में 300 पुस्तकालयों की स्थापना की. यह अन्ना आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका में रहे. पिछले 2 वर्षों से दरभंगा में रह रहे हंै और अपने एनजीओ के द्वारा यहाँ बसे छात्रों और शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं.

51. सविता भट्टी चंडीगढ़,
यह सामाजिक कारणों और समाज से अंधविश्वास के उन्मूलन के लिए काम कर रही है. यह एक विख्यात मंच कलाकार है. सविता जी ने टीवी धारा वाहिकों में काम किया है. वह अपने दिवंगत पति और कलाकार श्री जसपाल भट्टी का अधूरा काम पूरा करने की कोशिश कर रही हैं.

52. प्रोफेसर आनंद कुमार उत्तर पूर्वी दिल्ली,
वे जवाहर लाल विश्वविद्यालय में समाज शास्त्र के प्रोफेसर हैं. उन्होंने जेएनयू और बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के अलावा दुनिया भर में कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाया है. प्रोफेसर आनंद कुमार, छात्र आंदोलन के साथ जुड़े रहे हैं और सामाजिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक मोर्चे पर काम किया है.

53. महेन्द्रसिंह, नॉर्थवेस्ट दिल्ली,
वे दिल्ली में समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं. महेंद्र सक्रिय रूप् से 2011 में जन लोकपाल आंदोलन के बाद से एक स्वयं सेवक के रूप में जुड़े और दिल्ली विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए सक्रिय प्रचारकों में रहे. इन्हांेने सामाजिक संस्थाओं द्वारा गरीब और दलित वर्गों की लड़कियों के विवाह का आयोजन किया, और दहेज तथा बालविवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाया.

54. सारा यूसुफ, केरल त्रिशूर,
वे मलयालम की एक प्रख्यात उपन्यासकार और लघु कहानी लेखक हैं. उन्होंने मलयालम के प्रोफेसर के रूप में काम किया है. उन्होंने अपने उपन्यास ‘आलाहा युदे पेंमक्कल’ ( भगवान की बेटियां,पिता) के लिए केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार हासिल किया है।. वह अपनी साहित्यिक कृतियों के लिए कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं। वह केरल में नारी वादी आंदोलन में सबसे आगे रही हैं. वे मानुषी की संस्थापक हैं यह संगठन महिलाओं की समस्याओं के प्रति समर्पित है। वे आम लोगों के खिलाफ हो रहे अत्याचार के विरोध में आवाज उठाती रही हंै.

55. अजीत जॉय, तिरुवनंतपुरम, केरला
श्री अजित जॉय, एक सेवानिवृत आईपीएस अधिकारी हैं जिन्होंने 11 साल तक पुलिस डिपार्टमेंट की सेवा करने के बाद 2004 में सेवानिवृति ले ली थी. 2005 से 2013 तक वे यूनाइटेड नेशन ऑफिस में नशा और अपराध विभाग में कार्यरत थे. उन्होंने तिरुवनंतपुरम के एक सरकारी महाविद्यालय से एलएलबी की है. अमरीका में मेसाचुसेट्स में हार्वर्ड लॉ स्कूल से एलएलएम किया है. दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान वे यूनाइटेड नेशन द्वारा सौंपे कार्य को छोड़ ‘आप’ में शामिल हो गए. उन्होंने एक स्वयंसेवक के तौर पर दिल्ली विधानसभा चुनावों में ग्रेटर कैलाश विधानसभा क्षेत्र में कार्य किया और ‘आप’ के कानून विभाग में अपना योगदान दिया. दिल्ली चुनावों के बाद वह तिरुवनंतपुरम में सक्रीय रूप से ‘आप’ की गतिविधियों में शामिल रहे.

56. रचना धींगरा, भोपाल, मध्य प्रदेश.
इन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन (यू.एस.ए) से व्यापार प्रबंधन के क्षेत्र में शिक्षा हासिल की है तथा असेंचर कंसल्टिंग में कार्यरत रही हैं. वर्ष 2002 में अपनी नौकरी से त्यागपत्र देकर वह भोपाल आ गयीं जहाँ उन्होंने भोपाल काण्ड के पीडि़तांे के लिए न्यायपूर्ण व एक गौरवशाली जीवन के हक में कार्य किया. सूचना और क्रिया के लिए बने भोपाल ग्रुप की एक सदस्य के तौर पर, रचना पिछले 10 सालों से “भोपाल त्रासदी “ पर क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लड़ाई लड़ रही हंै. रचना इस मकसद में कानूनी क्रियाओं, जाती संगठनों और मीडिया प्रदर्शनों का नेतृत्व करती रही हंै. रचना पिछले 8 सालों से एक बहुत ही जबरदस्त और असरदार आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में उभरी हंै. रचना को इंडिया टुडे पत्रिका द्वारा जन-सेवा के लिए वर्ष 2010 में “वूमेन ऑफ द इयर” का खिताब भी दिया गया है.

57. अनिल त्रिवेदी, इंदौर, मध्यप्रदेश.
अनिल त्रिवेदी गाँधी जी, लोहिया जी, तथा जय प्रकाश जी जैसे लोगांे के आदर्शों से प्रदीप्तिमान हैं. जिन्होंने अपने युवा काल में सर्वोदय आन्दोलन और सम्पूर्ण परिवर्तन जैसे आंदोलनों में हिस्सा लिया है. आपातकाल के दौरान एमआईएसए में उनका नाम दर्ज हो चुका था जहाँ उन्हें 19 महीनों के लिए जेल में डाल दिया गया था और वहीं से उन्होंने कानून की परीक्षा भी दी अब वे मध्यप्रदेश में एक वरिष्ठ वकील के रूप में सामाजिक न्याय के धर्मयोद्धा माने जाते हैं. उन्होंने आदिवासी अधिकारों के लिए, मध्यप्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बाँध विस्थापितों, झुग्गियों के बेघरों तथा पर्यावरण से सम्बंधित कई मुद्दों पर मुकद्दमें लडें हैं. अभी हाल ही में उन्होंने जनहित में इंदौर नगर निगम द्वारा 29 गांव वालों को प्रताडि़त किये जाने का मुकद्दमा लड़ा और उसमें मुकद्दमा जीाता।

58. राजेश सरीयम, बेतुल (एसटी) मध्यप्रदेश.
राजेश सरीयम एक शिक्षा विशारदों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं. वह स्वयं भी एक स्कूल में शिक्षक रह चुके हैं. वह पिछले 20 सालों से बेतुल में जनजातीय युवाओं के हक में बहुत नजदीकी से कार्य कर रहे हैं। वह जनजातीय युवाओं को यू.पी.एस.सी और मध्य प्रदेश पी.एस.सी तथा अन्य सरकारी नौकरियों के लिए निःशुल्क तैयारी करवा रहे हैं. वह बेतुल के गाँव में एक बहुत ही सम्मानित व्यक्ति हैं.

59. माया विश्वकर्मा, होशंगाबाद, मध्यप्रदेश.
माया एक किसान की पुत्री हैं जिसने अपनी स्कूली शिक्षा-दीक्षा अपने गाँव नर सिंह पुर से की है. पढ़ाई में अव्वल रहने वाली माया ने जीव रसायनिकी में स्नातकोत्तर किया है. उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से कनिष्ठ अनुसंधान अनुदान भी प्राप्त किया है. उन्होंने अमरीका में एक परीक्षा देने के बाद वरिष्ठ अनुसंधान सहयोगी के तौर पर यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में भी कार्य किया, तत्पश्चात वह स्टैनफोर्ड अस्पताल में एक स्वयंसेवी के तौर पर कार्य करने लगीं. उन्हें अपनी कल्पनाओं को प्रदीप्तिमान करने का अवसर अन्ना आन्दोलन के समय मिला जिसमें उन्होंने अमेरिका से ही अपना सहयोग दिया था. अब वह अपने गाँव नरसिंहपुर वापस आकर पूरा समय आम आदमी पार्टी के लिए कार्य कर रही हैं.

60. पंकज सिंह, सिद्धी, मध्यप्रदेश.
रीवा-सिद्धी के एक ग्रामीण क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले पंकज ने बनारस हिन्दू विश्वविध्यालय से स्नातक की है. और दिल्ली में एक बहु प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्था “हैजर्ड सेंटर” में 3 साल तक कार्य किया. तत्पश्चात, मुंबई से उन्होंने मुंबई की टीआईएसएस से सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की जहां उन्हें “बेस्ट कम्युनिटी मोबिलाइजेर” का सम्मान भी प्राप्त हुआ. अब पंकज मध्य प्रदेश वापस आकर एक क्षेत्रीय महान संघर्ष समिति संगठन के साथ मिलकर एस्सार और हिंडाल्को जैसी बड़ी कम्पनियों को कोयला ब्लॉक्स आवंटन के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं.

61. शैलेन्द्र सिंह कुशवाहा, गुना, मध्यप्रदेश.
शैलेन्द्र पिछले 15 सालों से महिलाओं और बच्चांे के स्वास्थ्य और शिक्षा सम्बन्धी क्षेत्र में एक समाजसेवी संस्था चला रहे हैं. उन्होंने अन्ना आन्दोलन के समय अपना सहयोग दिया और बाद में आम आदमी पार्टी से जुड़ गए. इसके बाद उन्होंने संस्था को मध्यप्रदेश में खासकर ग्वालियर और चम्बल क्षेत्रों में मज़बूत बनाने के लिए कठोर परिश्रम किया.

62. अतुल मिश्रा, सागर, मध्यप्रदेश.
यह पेशे से एक वकील हैं जो दलितों और पिछडों के लिए बहुत ही दयालु भाव से कार्य करते आ रहे हैं. उन्होंने सक्रीय रूप से भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए “भ्रष्टाचार निवारण जन कल्याण मंच” के माध्यम से सागर में कई सारे भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर किया है जिनमें से एक बहुत लम्बी और मुख्य लड़ाई है सागर विश्वविद्यालय में अनियमित सरकारी खरीद का होना, जो कई वर्षों के परिश्रम के पश्चात विश्वविद्यालय में सीबीआई की रेड में सामने आया. वह बच्चों के टीका अभियान में भी सहयोगी रहे हैं.

63. बिसमय महापात्रा, भुबनेश्वर, ओडि़शा.
वर्तमान में बिसमय ‘आप’ के राज्य सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं. वह एम.एस.सी और प्रबंधन के क्षेत्र में स्नातकोत्तर करने के पश्चात १९९० से एक बहुत ही विकासात्मक कार्यकर्ता रहे हैं. उन्होंने अपना कार्य “प्रदान” (एक राष्ट्रीय स्तरीय एनजीओ ) के माध्यम से शुरू किया और जीविका समृद्धि के क्षेत्र में कार्य किया. इसके बाद टीसीएस में उनका एक छोटा सा कार्यकाल रहा जिसे उन्होंने बाद में छोड़ दिया और 2002 में “हर्षा ट्रस्ट” की नींव रखी जो एक गैरलाभ संस्था है. यह संस्था पेशेवर लोगांे द्वारा आधारिक रूप से कार्य करने का मार्ग प्रशस्त करती है. इस संस्था में लगभग 100 समर्पित पेशेवर लोग ओडिशा के 7 जिलों और 14 ब्लाक के, दूर जनजातीय क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं. इन दिनों उन्होंने “रेनैस्संस स्ट्रेटेजिक एंड मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड” को स्थापित किया है. यह संस्था उस जनजातीय जनसँख्या को पुनः नियमित और पवित्र प्रतिष्ठित करने की ओर एकजुट है जिसे औद्योगिक इकाइयों ने हटा दिया था.

64. डॉ. धनदा कांता मिश्रा, बेरहामपुर, ओडिशा.
डॉ. डीके मिश्रा अपने सामाजिक और पेशेवर क्षेत्र में एक शिक्षक, व्यवस्थापक तथा अनुक्रामिक उद्योगपति हैं. उनकी शैक्षिक योग्यताओं में त्रिची के रीजनल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बी.टेक (सिविल), यूनिवर्सिटी ऑफ ओक्लाहोमा (अमरीका) से एम.टेक(स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग), और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन(अन्न आर्बर, मिशिगन) से पीएचडी (सिविल इंजीनियरिंग मैटेरियल्स) शामिल है. डॉ. मिश्रा ने कई सालों तक शिक्षा और व्यवस्था के क्षेत्र में अनेक पदवियों को संभाला है. वह के आईआईटी विश्वविध्यालय में अध्यक्ष (अनुसंधान और औद्योगिक समन्वयन) पद पर तथा जेआईटीएम, पर्ला खेमुन्दी में प्रधानाचार्य के पद पर सुशोभित रहे हैं. सेंचुरियन विश्विद्यालय, सेंचुरियन पब्लिक स्कूल, सेंचुरियन आईटीसी और एआईडी रूरल टेक्नोलॉजी रिसोर्स सेंटर तथा आईटीसी पर्लाखेमुन्दी की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाने के अलावा वह जेआईटीएम (आरएंडडी) में निदेशक तथा सीएसआरईएम के न्यासी भी रह चुके हैं. डॉ. मिश्रा पहले ख्याति प्राप्त राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं जैसे रोक्ला टेक्नोलॉजी, गिल्डफोर्ड(ऑस्ट्रेलिया) तथा एसोसिएटेड सीमेंट कम्पनीज इंडिया लिमिटेड (एसीसी) के साथ भी काम कर चुके हैं. वर्तमान में भी वह केएमबीबी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में निदेशक (शैक्षिक) के रूप में नियुक्त हैं.

65. डॉ. विकाश दास, कट्टक, ओडिशा.
डॉ. विकाश दास, ओडिशा में एक चिर परिचित मानव अधिकार कार्यकर्ता व वकील हंै. वे लगातार कानून के माध्यम से मानव अधिकार की प्राप्ति के लिए पिछले दो दशकों से काम कर रहे हंै. स्वतंत्रता सेनानियों और सर्वोदय कार्यकर्ताओं के परिवार में जन्मे, डॉ. दास बड़े पैमाने पर अपने संगठन “क्लैप” के ज़रिये मानव अधिकार कानून के माध्यम से अन्याय के उन्मूलन और न्याय को बढ़ावा देने की दिशा में काम करते रहे हैं. वर्तमान में वह “क्लैप” के अध्यक्ष हैं जो भारत का सबसे पुराना कानूनी सहायता उन्मुख मानव अधिकार संगठन है. डॉ. दास ने 2003 से 2006 के बीच खाद्य के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के सलाहकार के रूप में कार्य किया. उन्हें ओडिशा सरकार द्वारा जांच कमीशनर के रूप में खाद्य सुरक्षा योजनाओं में अनियमितताओं की जांच करने के लिए नियुक्त किया गया था. उन्होंने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से कानून और प्रशासन में पीएचडी की है.

66. जिमुता प्रसाद मिश्रा, ढेंकनाल, ओडिशा
इन्होंने जेएनयू, नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एम. फिल किया है. उन्होंने अपने आप को पिछले 12 सालों से विकास के क्षेत्र में समर्पित किया है तथा उनके शोध प्रकाशन भी बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं. वह प्रलेखन और अनुसंधान के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं तथा राज्य में एक आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में भी जाने जाते हैं. पूर्व में वे ओडिशा सूचनाअधिकार मंच से काम कर रहे थे.

67. ममता कुंडू, बालासोरे, ओडिशा.
ममता कुंडू उत्कल विश्व विद्यालय, वाणी विहार से स्नातक, एक गृहिणी और एक सामाजिक कार्यकर्ता हंै. वह चारों ओर भ्रष्ट व्यवस्था के बारे में बहुत चिंतित हैं और उनका भ्रष्टाचार मुक्त भारत को साकार करने का एक सपना भी है. “वायु सेना पत्नी कल्याण संघ” के एक सदस्य के रूप में सामाजिक कार्य के उनके अनुभव के साथ ही वह जन लोकपाल आंदोलन में शामिल हो गयीं और बाद में पूरी तरह से एक सक्रिय सदस्य के रूप में आम आदमी की पार्टी में शामिल हो गयी. उन्होंने ओडिशा के बालासोर जिले में पार्टी के संगठन निर्माण की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

68. सत्य महर, कालाहांडी, ओडिशा.
वह एक सामाजिक कार्यकर्ता और सचेतन नागरिक मंच (काला हांडी के विकास के लिए काम कर रहा एक नागरिक मंच) के नेता हैं. वह नियम गिरि विरोध आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा हैं जिन्होंने नियंगिरी पहाडि़यों और आदिवासियों की आजीविका के संरक्षण के लिए काम किया है. वह पर्यावरण और जनजातीय आजीविका पर कॉर्पोरेट हमले के खिलाफ पिछले 12 वर्षों से प्रतिरोध के एक दृढ़ स्रोत रहे हैं. उन्होंने ओडिशा राज्य में सभी लोगों के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और युवा तथा स्थानीय आदिवासी के लिए एक प्रेरणा रहे हैं।

69. निरादा बरना खुंटिया, पूरी, ओडिशा.
निरादा, नीमापदा कॉलेज की एक छात्र नेता हैं जो छात्र महासचिव के रूप में निर्वाचित हुई हैं. वे 1982 में गरीब छात्रों को सुरक्षा, छात्रावास की सुविधा, छात्रवृत्ति आदि के अधिकारों के लिए की गयी “ऑल ओडिशा स्टूडेंट स्ट्राइक” में एक नेता थी. वह 1988-2007 के बाद से नीमापदा कॉलेज में व्याख्याता के रूप में कार्यरत रहीं. उस अवधि के दौरान भारत सरकार द्वारा उन्हें सामाजिक सेवा और स्वयंसेवा के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. 2007 में उन्होंने, नीमापदा पंचायत समिति के अध्यक्ष के रूप में चुनाव लड़ा और बाद में एनएसएस प्रशिक्षण केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक के रूप में शामिल हो गयी. इन्हांेने पूरे ओडिशा में 2000 से अधिक एनएसएसएस कार्यक्रम अधिकारियों के प्रशिक्षण का नेतृत्व भी किया.

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